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STBA Oath Ceremony 2025 09-5-2025

Hotel The Golden Apple, Mananagar, Lucknow

"Samvad" In which, under GST, a lecture on the topic "GST Tribunal Practice: Law and Procedure" will be delivered by Hon'ble High Court Advocate Shri Akshay Agarwal Ji, along with resolution of related practical issues at the Tribunal. Additionally, in th 09-1-2026

Auditorium located on the 6th floor of the Rajyakara Bhawan, Lucknow.

ABOUT STBA


उत्तर प्रदेश शासन ने 31 मार्च 1948 को जिला आपूर्ति कार्यालय को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया था। इस विभाग के बन्द होने से शासन की आय में कमी आने की आषंका थी। इसीलिये अपनी आय के स्त्रोत बढ़ाने हेतु उत्तर प्रदेष शासन ने 1 अप्रैल 1948 से उ0प्र0 बिक्री कर अधिनियम 1948 लागू किया था। इस अधिनियम के अनुसार प्रदेश के अन्दर बिक्री पर व्यापारी को ग्राहक से कर वसूल कर षासन के खाते में जमा करना था। इस प्रकार यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर था। कम शिक्षित व्यापारी वर्ग कानून की पेचीदगियाॅ न समझ पाने के कारण अपने को परेशानियों से घिरा पाने लगा। ऐसी परिस्थितियों में, इस अधिनियम के अन्तर्गत कार्य के सुचारू रूप से संचालन तथा व्यापारी वर्ग को अधिकारी गणों के उत्पीड़न से रोकने हेतु अधिवक्ताओं ने पदार्पण किया। जिला पूर्ति कार्यालय महात्मा गांधी मार्ग पर स्थित था, उसके भवन में ही बिक्री कर कार्यालय प्रारम्भ किया गया। प्रारम्म्भ में केवल एक बिक्री कर अधिकारी से विभाग प्रारम्भ हुआ। शीघ्र ही यह कार्यालय तिलोई हाऊस में चला गया। तिलोई हाऊस में ही विभाग का विस्तार हुआ एवं जज (अपील) व जज (रिविजन) का कार्यालय भी प्रारम्भ हुआ। तत्पशचात् बिक्री कर कार्यालय बाला कदर रोड, जहां पर वर्तमान में बाॅट व माप कार्यालय है, वहां गया। यहां से गोलागंज स्थित जस्टिस बेग की कोठी में आ गया। अब तक आते-आते विभाग का विस्तार होने लगा था। अधिकारी व कर्मचारियों की संख्या बढ़ने लगी थी, तद्नुसार अपील व जज रिविजन का कार्य भी बढ़ने लगा था। अतः अब सभी कार्यालय एक भवन में आने कठिन हो गये थे। इसीलिये गोलागंज से कार्यालय नदवा भवन, स्काई लार्क भवन व कई अन्य इलाकों व भवनों में स्थानान्तरित हो गये। इसी प्रकार आयुक्त का कार्यालय, जज (अपील) व जज (अपील) व जज (रिविजन) बटलर पैलेस में आ गया। बाद में जज (अपील) गोलागंज, वहां से नानपारा हाऊस और फिर मीराबाई मार्ग स्थित आर्य समाज मन्दिर के प्रांगण में स्थित भवन में आ गया। इसी दौरान 1961 में जज (अपील) का नाम परिवर्तित करके सहायक आयुक्त (जुडिशियल) कर दिया गया। जज (रिविजन) का कार्यालय भी मीराबाई मार्ग स्थित आर्य समाज मन्दिर के प्रांगण में आ गया। अब व्यापारियों, अधिवक्ताओं एवं कर्मचारियों का अधिकांष समय षहर के विभिन्न कोनों में स्थित कार्यालयों में दौड़ने में ही निकलने लगा। अन्त में बिक्री कर का मुख्यालय स्टेशन रोड पर पी.सी.एफ. भवन में तथा शष सभी कार्यालय मीराबाई मार्ग स्थित अपने भवन (वर्तमान) में फरवरी 1987 में आ गये। तत्पष्चात् मुख्यालय भी गोमती नगर में निर्मित अपने भवन में स्थानान्तरित हो गया।

बिक्री कर विभाग में 1948 से ही कार्य प्रारम्भ हो गया था। कार्य प्रारम्भ होते ही अन्य क्षेत्रों में वकालत करने वाले कुछ अधिवक्ता यहां पर कार्य करने लगे। उस समय अधिवक्तागणों में स्व0 श्री सिद्धनाथ मिश्र जी, स्व0 श्री राम गुप्त जी, जो वर्श 1937 से माल की वकालत कर रहे थे, स्व0 श्री जय किषोर श्रीवास्तव जी, जो आर.एफ.सी. कार्यालय में वकालत कर रहे थे, स्व0 अशोक कुमार अग्रवाल, जो वर्श 1946 से आयकर में वकालत कर रहे थे, स्व0 श्री बैजनाथ जी तथा स्व0 रियासत उल्ला खां प्रमुख थे। बाद में स्व0 के.एल. कुमार एवं स्व0 एल.एन. जोषी साहब वकालत में आये थे। उक्त सभी महानुभावों ने अधिवक्ता पेषे को बहुत ईमानदारी एवं सम्मान के साथ किया।

वर्श 1950 में गणतन्त्र दिवस की घोशणा हुई तब उक्त महनुभावों ने उच्च अधिकारियों से मिलने हेतु तथा दिन प्रतिदिन की समस्याओं के निदान हेतु नवम्बर 1952 में एक संगठन का गठन किया, जिसके अध्यक्ष स्व0 सिद्धनाथ मिश्र जा को बनया गया तथा स्व0 श्रीराम गुप्त को सचिव का पद सौंपा गा। उसके उपरान्त धीरे-धीरे इस संगठन में अधिवक्ताओं का आगमन वर्श 1955 के उपरान्त प्रारम्भ हो गया। जो अधिवक्तागण आयकर विभाग में कार्य कर रहे थे, वे भी कभी-कभी किसी व्यापारी के कार्य हेतु बिक्री कर विभाग में आने लगे।

वर्श 1956 में गल्ले पर बिक्री कर लागू हुआ, इससे कार्यक्षेत्र में वृद्धि होने लगी। धीरे-धीरे अधिवक्ताओं की संख्या बढ़ने लगी। वर्श 1964 में संस्था का लिखित संविधान तैयार किया गया। संविधान के निर्माण हेतु समिति में स्व0 पं0 सिद्धनाथ मिश्र, स्व0 बाबू श्रीराम गुप्त, स्व0 बाबू जय किषोर श्रीवास्तव, स्व0 अषोक कुमार अग्रवाल तथा स्व0 सीताराम अग्रवाल थे। इन सभी लोगों के अथक प्रयास से संविधान का रूप सामने आया। यह प्रथम संविधान अक्तूबर 1967 में सोसाइटी एक्ट के अन्तर्गत पंजीयन हेतु दिया गया था, जो दिनांक 07-11-1967 से पंजीकृत किया गया। इस संविधान के अनुसार संस्था का नाम ’’लखनऊ सेल्स टैक्स बार एसोसियेषन’’ रखा गया। पंजीकृत संविधान के अनुुसार स्व0 श्रीराम गुप्त जी अध्यक्ष चयनित किये गये क्योंकि अब तक अध्यक्ष पद पर रहे स्व0 सिद्धनाथ मिश्र जी राजनीति में अधिक व्यस्त रहने के कारण संस्था के कार्यो हेतु अधिक समय नहीं दे पा रहे थे। उपाध्यक्ष पद पर स्व0 अषोक कुमार अग्रवाल एवं स्व0 एल.एन. जोषी, सचिव पद स्व0 राधे ष्याम टण्डन तथा कोशाध्यक्ष के पद पर स्व0 सीताराम अग्रवाल जी को चयनित किया गया। इन सभी के प्रयासों से संस्था का कार्य संविधान के अनुरूप संचालित होता रहा। उस समय सदस्यता षुल्क रू.2.00 था तथा दो रूपये विज्ञप्तियों आदि की छपाई करा कर सदस्यों के मध्य वितरण करने का कार्य स्व0 सीताराम अग्रवाल जी द्वारा होता था। संस्था का खाता उत्तर प्रदेष को-आपरेटिव बैंक में खोला गया जो लगभग एक दषक पूर्व ही बन्द किया गया है। अधिवक्ताओं की संख्या में प्रतिवर्श वृद्धि होती रही। वर्श 1970-71 तक इस संस्था में लगभग 44 सदस्य थे। इसी वर्श संस्था में पुस्तकालय को प्रारम्भ किया गया, जिसमें श्री मुन्ना लाल अग्रवाल एडवोकेट ने सेल्स टैक्स केसेज वाल्यूम-26 तक का पूरा सेट दिया। श्री श्रीराम गुप्ता जी ने यू0पी0 सेल्स टैक्स एक्ट व सेन्ट्रल सेल्स टैक्स एक्ट व स्व0 सीताराम अग्रवाल जी ने यू0पी0 सेल्स टैक्स डाइजेस्ट तथा दूसरे अधिनियमों की लगभग 80 (अस्सी) पुस्तकें दान में दीं। इसके उपरान्त एसोसियेषन ने सेल्स टैक्स मैनुअल व सेल्स टैक्स केसेज मंगाना प्रारम्भ कर दिया। अग्रेतर वर्शो में भी स्व0 सीताराम अग्रवाल, स्व0 वी.एन. टण्डन, श्री सीताराम टण्डन, श्री एम.जी. गुप्ता, स्व0 प्रदीप कुमार अग्रवाल व कई अधिवक्ताओं के द्वारा भी पुस्व्तकालय हेतु पुस्तकें प्रदान की गई हैं। वर्तमान में संघ के पुस्तकालय में अध्यावधिक पुस्तकें तथा विधि जनरल उपलब्ध हैं। वर्श 1974 में विज्ञप्ति संख्या एस.टी.दो-2566/दस-10/74 दिनांक 23-05-74 के द्वारा एसोसियेषन का नाम सलाहकार समिति में आया, जिसमें एसोसियेषन का प्रतिनिधित्व स्व0 सीताराम अग्रवाल जी द्वारा किया गया।

वर्श 1969 में संस्था द्वारा प्रथम बार ’’होली मिलन’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी वर्श 1969 में प्रथम बार अधिवक्ताओं एवं अधिकारीगणों के बीच रेलवे ग्राउण्ड पर क्रिकेट मैच का आयोजन हुआ।

वर्श 1978 में स्व0 केसरी नारायण गोयल जी अध्यक्ष, श्री गोपाल नारायण मेहरोत्रा जी सचिव व श्री ज्ञान नारायण रस्तोगी जी कोशाध्यक्ष थे। तत्कालीन सचिव श्री गोपाल नारायण मेहरोत्रा जी की पहल पर नई कार्यकारिणी का षपथ ग्रहण एक समारोह के रूप में आयोजित किया गया। इसी वर्श दिनांक 14-09-78 को डा0 जे.पी. सिंह, तत्कालीनल आयुक्त बिक्री कर, उ0प्र0 लखनऊ का रविन्द्रालय में अभिनन्दन किया गया। उसी समय आयुक्त महोदय ने बिक्री कर विभाग हेतु नये भवन की बात स्वीकार की, जिसको उन्होंने वर्श 1986 में अपने वादे को पूरा कराया। उस समय वे प्रमुख सचिव थे।

नये भवन में बिक्री कर कार्यालय को लाने का श्रेय सेल्स टैक्स बार एसोसियेषन के वर्श 1985-86 में संघ के अध्यक्ष श्री के.सी. सिन्हा तथा सचिव स्व0 प्रदीप कुमार अग्रवाल एवं 1986-87 के अध्यक्ष श्री गोपाल नारायण मेहरोत्रा जी को जाता है। इन लोगों ने काफी लिखा-पढ़ी व व्यक्तिगत सम्पर्क से यह कार्य सम्पन्न कराया तथा वर्तमान अधिवक्ता कक्ष आवंटित कराया।

संस्था बनने के प्रारम्भिक वर्शो में सदस्य संख्या काफी कम रही, परन्तु समय के साथ इसमें वृद्धि होती रही। वर्श 2002-03 में हमने संस्था का रजत जयन्ती मनाई। उस समय हमारी सदस्य संख्या केवल 185 थी, जो वर्तमान सत्र में ...... है। स्व0 सीताराम अग्रवाल संस्था के प्रथम आजीवन सदस्य थे, उनके बाद कई अन्य सदस्य भी आजीवन सदस्य बने। वर्तमान में केवल सात सदस्य ही आजीवन सदस्य के रूप में हमारे साथ हैं।

हर परिवार में कुछ सदस्य ऐसे होते हैं, जिनकी कार्य षैली सबसे अलग होती है इसी कारण परिवार के वे सदस्य अपना अलग अस्तित्व बनाना चाहते हैं। यही स्थिति हमारे सघ में भी वर्श 1985-86 के दौरान आई और कुछ सदस्यों ने इस संघ से अलग होकर एक पृथक एसोसियेषन ’’टैक्स लायर्स एसोसियेषन की स्थापना की। वर्तमान में दोनो ही संस्थायें अधिवक्ता हितार्थ कार्यरत हैं।

वर्श 1978 में सेल्स टैक्स बार एसोसियेषन लखनऊ ने उत्तर प्रदेष सेल्स बार एसोसियेषन का पांचवा अधिवेषन दिनांक 14 व 15 अक्तूबर 1978 को रविन्द्रालय में कराया था। इस अधिवेषन में प्रथम बार प्रान्तीय संघ का चुनाव निर्विरोध कराया गया था। अधिवेषन के चेयरमैन स्व0 राधेष्याम टण्डन व संयोजक स्व0 के.एन. गोयल थे।

इसके बाद दिनांक 14 व 15 नवम्बर 2009 को पुनः 28वां अधिवेषन संघ द्वारा महाराजा अग्रसेन इण्टर कालेज, लखनऊ में आयोजित कराया गया। इस अधिवेषन के चेयरमैन श्री अंजनी कुमार श्रीवास्तव व संयोजक श्री सौरभ सिंह गहलौत थे।

वर्श 2002-03 को संस्था के स्वर्ण जयन्ती वर्श के रूप में मनाया गया। पूरे वर्श खेल प्रतियोगितायें, वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। समापन कार्यक्रम हेाटल क्लाक्र्स अवध में दिनांक 16-06-2003 को आयोजित कर वरिश्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सरकार के मंत्री श्री राजेष अग्रवाल जी थे। कार्यक्रम का आयोजन श्री गोपाल नारायण मेहरोत्रा, चेयरमैन श्री अषोक कुमार सिंह को-चेयरमैन, श्री सौरभ सिंह गहलौत-संयोजक व अध्यक्ष व प्रदीप कुमार अग्रवाल के सहयोग व मार्ग दर्षन में किया गया था। हमारी संस्था हेतु यह गौरव का विशय है कि हमारे अनेक सदस्यों को समाज में, राजनीति में तथा अधिवक्ता संगठनों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ। पं0 सिद्धनाथ मिश्र लखनऊ के मेयर बने, श्री सै0 सिब्ते रजी केन्द्र सरकार में मन्त्री रहे व बाद में एक महत्वपूर्ण राज्य के राज्यपाल रहे, श्री गोपाल नारायण मेहरोत्रा जी लायन्स क्लब इण्टरनेषनल के गवर्नर बने, श्री राधे ष्याम साहू एवं श्री मुकेष सिंह चैहान नगर निगम के पार्शद चुने गये, स्व0 सीताराम अग्रवाल आल इण्डिया फेडरेषन आफ टैक्स प्रैक्टिषनर्स की कार्यकारिणी के सदस्य, यू0पी0 टैक्स बार एसोसियेषन के कोशाध्यक्ष एवं यू0पी0 टैक्स एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसियेष�

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